रूसी चुटकले-2
गलियारे में
प्रश्न – पुतिन*1* और मिद्वेदिव*2* (मेदवेदेव) में क्या अन्तर*3* है?
उत्तर – इन दोनों शब्दों का कोई भी अक्षर एक-दूसरे से मेल नहीं खाता।
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*1* Vladimir Putin रूस के पूर्व राष्ट्रपति तथा वर्तमान प्रधानमन्त्री। पुतिन शब्द का अर्थ – सुलझा हुआ, चरित्रवान, सज्जन या सही व्यक्ति इत्यादि होता है।
*2* Dmitriy Medvedev रूस के वर्तमान राष्ट्रपति (उच्चारण मिद्वेदिव् है)। रूसी भाषा में शब्द के एक ही स्वर पर जोर देते हैं अर्थात् बड़ा आ, बड़ी इ, बड़ा उ, बड़ा ए या बड़ा ओ में से एक ही स्वर किसी शब्द में हो सकता है। यहां “व” के बाद वाले “ए” पर जोर है, अन्य दो ए कोमल होकर “इ” में बदल गए हैं। लिखा जाता है मेद्वेदेव् पढ़ा जाता है मिद्वेदिव्। इस शब्द का रूसी में अर्थ है “भालू” और भालू का अर्थ होता है “शहद का ज्ञानी”।
*3*पुतिन दो बार रूस के राष्ट्रपति रहे क्योंकि यहां के संविधार के अनुसार कोई भी लगातार केवल दो बार ही राष्ट्रपति के पद पर रह सकता है। पुतिन ने भावी राष्ट्रपति के लिए अपने विश्वसनीय मिद्वेदिव का नाम प्रस्तावित कर दिया जिससे कोई कोई इंकार नहीं कर सकता। इस तरह मिद्वेदिव राष्ट्रपति बन गए और पुतिन बक़सूर प्रधानमन्त्री को बेवक़्त हटा कर उसकी कुर्सी पर बैठ गए। पहले यहां प्रधानमन्त्री की कुर्सी बहुत छोटी थी उसके नीचे पतिन ने खुब सारी ईंटे लगा लीं, अब ये कुर्सी यहां सबसे ऊँची है। अब ये हालत है कि राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री के बीच का “अन्तर” पता ही नहीं चलता, इसी लिए इस चुटकले का जन्म हुआ।
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रूस में
“कम जन, अधिक ऑक्सीजन”
(मेंशे नारोदु, बोल्शे किस्लारोदु)
मेंशे = कम
नारोद = लोग, जन
बोल्शे = अधिक
किस्लारोद = ऑक्सीजन
(हालांकि रूस की जनसंख्या बहुत कम है लेकिन फिर भी ये बहुत मशहूर है। यहां की सरकार जनसंख्या बढ़ाने के लिए पहले बच्चे के बाद होने वाले हर बच्चे को पाँच लाख रूपये देती है।)
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मिट्टी में
एक मरीज़ डॉक्टर से अपनी रिपोर्ट के बारे में पूछता है।
डॉक्टर- तुम्हे मिट्टी से नहाना*1* चहिए।
मरीज़- मिट्टी से नहाने पर रोग में सुधार होगा?
डॉक्टर- नहीं, मिट्टी में*2* रहने की आदत हो जाएगी।
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*1* पूर्वी यूरोप के देशो में चिकनी मिट्टी से नहाने का प्रचलन बहुत है, हालांकि यहां मुलतानी मिट्टी जैसी बढ़िया मिट्टी नहीं मिलती। चिकनी मिट्टी को रूसी में ग्लीना कहते हैं।
*2* कब्र में
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पानी में
एक ग़रीब आदमी की तपस्या से प्रसन्न होकर बोग*1* (भगवान्) पूछते हैं क्या चाहिए? आदमी कहता है मैं अमीर बनना चाहता हूँ। बोग कहते हैं ठीक है लेकिन इसकी कीमत ये है कि तू पानी में डूबकर मरेगा। वो आदमी स्वीकार कर लेता है और मन ही मन निश्चय करता है कि कभी पानी में सफर नहीं करेगा।
क्रीम*2* में आराम करने की लॉटरी लग जाती है, तो सोचता है कि तट पर ही धूप सेकुंगा, सागर में नहीं नहाउंगा। जब तट पर आराम से सो रहा होता है उसी समय कोई उसे लॉटरी में जहाज से सैर करने का एक फ्री टिकट दे देता है, मन में लालच आ जाता है। सोचता है– मैं अकेला थोड़ी ही हूँ, वहाँ तो बहुत लोग होंगे, मुझे मारने के लिए बोग सबको तो मारेगें नहीं। जहाज पर सवार हो जाता है।
तट से दूर पहुँचने पर जहाज डूबने लगता है। बोग को पुकारता है, पूछता है, मेरे कारण आप ढाई हजार लोगों को क्यों मार रहे हो?
बोग कहते हैं– ये तो मैं ही जानता हूँ कि कैसे-कैसे ये 2500 लोग मेंने एक जगह इकट्ठे किये।
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*1* बोग मतलब भगवान्, उच्चारण बोग् है। जैसे पवन को हम लोग पवन् उच्चारण करते हैं उसी प्रकार दुनिया की हर (संस्कृत के अलावा) भाषा में है।
*2* यहाँ रस्सिया में सभी लोगों को आराम करने के लिए गर्मी के मौसम में 1 महीने की छुट्टी मिलती है। लगभग सभी लोग किसी गर्म क्षेत्र वाले समुद्री तट पर आराम करने जाते हैं, इनमें से ज्यादातर “यूक्रेन” के “क्रीम” नामक क्षेत्र में आराम करते हैं। बहुत से लोग तुर्की और मिश्र के सागर-तट पर आराम करते हैं।
*2* “क्रीम” यूक्रेन के दक्षिण में है इसके लगभग चारों ओर कालासागर है, उत्तर में सड़क और रेल मार्ग से यूक्रेन की भूमि से जुड़ा है, ये पहले कभी अलास्का की तरह रस्सिया का हिस्सा था, ख़्रुशोव ने क्रीम यूक्रेन को दे दिया था।
जो बहुत ग़रीब आदमी है वो अपने फार्म-हाऊस (जिसे ये लोग “दाचा” कहते) में आराम करता है। यहां लगभग हर आदमी का अपना फार्म-हाऊस है, चाहे कितना भी ग़रीब क्यों न हो। ज्यादातर लोगों के एक से ज्यादा फार्म-हाऊस हैं। लेकिन आमतौर से फार्म-हाऊस पर लोग कसकर मेहनत रहते हैं। साल भर के लिए आलू तो जरूर ही उगा लेते हैं। आलू को तहख़ाने में रख कर साल भर खाते हैं। क्योंकि अक्तूबर से अप्रैल तक बर्फ और ठंड के कारण यहां कुछ नहीं उगता।
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ट्रैफिक पुलिसिया यमलोक में
एक ट्रैफिक पुलिसिया मर कर यमलोक पहुँचता है
यमराज – तुमने अच्छे-बुरे दोनो काम बराबर किये हैं। इसलिए इन दोनो रास्तों में से जो भी चुनना है चुन लो, स्वर्ग का या नरक का।
ट्रैफिक पुलिसिया – आप मुझे यहीं चौक पर रहने दो।
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ट्रैफिक पुलिस के थाने में
ट्रैफिक पुलिस वाले के लड़का हुआ, तो वो अपने अफसर के पास जाकर कहता है-
पुलिसिया– सर! लड़का हुआ है, कुछ तरक्की?
ऑफिसर– ठीक है, 200रु.।
पुलिसिया– नहीं सर! इसमें तो उसकी महीने भर की डाइपर भी नहीं आएगी।
ऑफिसर– ठीक है, 500रु.।
पुलिसिया– नहीं सर! इसमें तो उसके महीने भर का दूध भी नहीं आएगा।
ऑफिसर– 40 (speed limit) का बोर्ड हाथ में देते हुए कहता है – ले, जहां जी में आए लगा ले।
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(जैसे भारत में अधिकतम गति सीमा 60 कि. मी. प्र. घं. है, रूस में 100km. p/h. है। मतलब ये 40 भारत के लिए 30 के बराबर हैं। यूरोप के कई देशो में अधिकतम गति सीमा 140 तक है। जर्मनी के शहरों में तो अन्य यूरोपीय देशों की तरह ही गति सीमा है लेकिन हाई-वे पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है और सड़कें भी इस लायक हैं। मैं 215 km. p/h. सफर कर चुका हूँ लेकिन वहां पर 260 आम बात है।)
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सैलून में
एक कैथोलिक फादर, नाई से बाल कटकवा कर पूछता है कितने पैसे?
नाई जवाब देता है-आप तो फादर हैं, आप से भला मैं पैसे कैसे ले सकता हूँ?
कैथोलिक फादर अगले दिन सुबह वाइन की 12 बोतले दे जाता है.
अगले दिन ऑर्थोडॉक्स (रूसी) फादर बाल कटवा कर पैसे पूछता है तो नाई वैसे ही कहता है.
आप तो फादर हैं, आप से भला मैं पैसे कैसे ले सकता हूँ?
ऑर्थोडॉक्स फादर अगले दिन सुबह 12 वोदका की बोतले भेंट कर जाता है.
अगले दिन यहूदी फादर उसी नाई से बाल कटवाता है, पूछने पर नाई वैसे ही जवाब देता है.
अगले दिन यहूदी फादर 12 यहूदी फादरों को बाल कटवाने के लिए भेज देता है.
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चर्च में
एक यहूदी आदमी (फादर से) कहता है कि मेरे लड़के ने यहूदी धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया है, क्या करूं? फादर कहता है कि कल भगवान् (यहोवा) से पूछ कर बताउंगा ।
फादर अगले दिन उस आदमी से कहता है- मेरी समझ में कोई उपाय नहीं आ रहा । यहोवा ने कहा कि उसके साथ भी यही समस्या है ।
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